Sunday, 23 February 2014

पी ० एल ० डी ० से जुड़ना सम्मान कि बात

दोस्तों में  आज  में  पी ० एल ० डी  ० परिबार  का एक हिस्सा  होना अपने आप में एक सम्मान कि बात है पी ० एल ० डी  ० क्रेडिट कोआपरेटिव  सोसाइटी लिमिटेड भारत कि सबसे अधिक प्रगति करने बाली सोसाइटी है इस  सोसाइटी ने अपना कम  २४ जन ०  २०१३ से स्टार्ट किया और मुझे  ऑक्टूबर  २०१३ से सेवा का मोका मिला मैंने पी ० एल ० डी  ० क्रेडिट कोआपरेटिव  सोसाइटी लिमिटेड में  ब्रांच  हेड  के पद पर कार्य  देखना स्टार्ट किया और देखते ही देखते पी ० एल ० डी  ० क्रेडिट कोआपरेटिव  सोसाइटी लिमिटेड दिन दूनी और रात चौगनी  तरक्की  करने लगी  सोसाइटी में कार्य करते करते  मुझे अहसास होने लगा कि मै  किसी सस्था के साथ कार्य नहीं कर रहा हुँ  बल्कि अपने परिबार के साथ कार्य कर रहा हुँ !

Friday, 7 February 2014

PLD Credit Co- Operative Society Limited Online Banking

INDIA:" said Sanjeev Saraswat, CEO, PLD  Credit Co-operative Society

With a reach of over a million members across India through its branches and Advisors network, PLD  Credit Co-operative Society Ltd has an extensive branch network and reaches out to people in remote areas. They have traditionally played an important role in creating banking habits among the lower and middle-income groups and in strengthening the rural credit delivery system. Taking a step toward its contribution to drive financial inclusion in the country,
PLD Credit Co-operative Society Ltd, a leading multi-state credit co-operative society, has deployed Online Banking to support its vision of offering a seamless, personalized and contextually relevant functionality at the right time to its members any time, any place across India.

Committed to reach to every corner of the country, PLD Credit Co-Operative Society helps raise the social and financial status of its members by inculcating saving habits, while also providing technical and financial support. With the implementation of Online Banking, PLD  will now be able to offer customers a fast, easy and convenient way to conduct bank transactions in a secure, user-friendly, and cost-efficient application platform.

"Mobile-led financial inclusion represents a huge growth opportunity in developing economies like India. Optimising the payment gateway through Online Banking will assist us to meet the requirements of the under served population. Our constant endeavour is to create a customer friendly service environment in order to galvanize the momentum of financial inclusion in the country,

Tuesday, 4 February 2014

हाँ यह सही हे दोस्तों पैसा ब्लॉग और वेबसाइट से भी कमाया जा सकता हे

दोस्तों पैसा तो लोग बहुत कमाते है पर पैसा कमाने का जो तरीका में आप को बताने  जा रहा  हुँ   उसे  पड़कर  आप महसूस करेगे कि किया  पैसा ऐसे भी कमाया जा सकता हे  हाँ  यह सही हे दोस्तों पैसा  ब्लॉग  और  वेबसाइट  से भी कमाया जा सकता हे और आज कल तो  विडियो  से भी पैसा कमाने में लगे हुए है
        दोस्तों पैसा ही जीवन का सबसे बड़ा अमूल  धन है ब्लॉग और वेबसाइट आज पैसा कमाने  के सबसे बेस्ट  तरीको में से है  यो यो  हनी  सिंह से लेकर गंगम स्टालय  जैसे  गानो ने रातो रात करोडो  रुपए  कामये  और देश बिदेश में रातो रात हनी  हनी  और गंगम गंगम  हो गई आज हर  दोस्त इन  से परिचित है
              आप भी आज से ही पैसा एअरनिंग  कर सकते है ब्लॉग आज से है स्टार्ट करे और earn  करे पैसा ही पैसा     अधिक  जानकारी  के लिए पड़ते रहे  मुस्कान ब्लॉग 

Saturday, 4 January 2014

भगबान मेरी पुकार सुनो -हे भगबान '' तुम समझते क्य़ो नहीं हो

एक  व्यक्ति ने एक खुशाल जीवन जिया लेकिन बुढ़ापे में आकर इसे यह अह्सास  हुआ कि उसके पास सम्पति के नाम  पर कुछ भी नहीं हे और बो गिड़गिड़ाते हुए  घुटनो  के बल बैठ कर  भगबान से पार्थना करने लगा कि है भगबान में एक अच्छा आदमी हुँ मैंने आज तक आप से कुछ भी नहीं मांगा और  जो भी आप ने दिया उसके लिए में आप का आभारी हुँ लेकिन आज मेरी सिर्फ एक पुकार सुन लो  मुझे एक लाटरी जितवा दो
 हफ्ते बीत गए लेकिन कुछ नहीं हुआ  उसने दोबारा भगबान से लाटरी जितबाने के लिए पार्थना की लेकिन फिर भी कुछ  नही हुआ  कई महीने बीत जाने के बाद  उसकी बर्दास्त कि हद पार हो गई और फिर बो आसमान की ओर देखकर चिल्लाने लगा  कि '' हे भगबान '' तुम  समझते क्य़ो नहीं हो , में सिर्फ एक लाटरी  जितबाने के लिए ही कह रहा  हुँ !  उसी समय आसमान से आबाज  गुजी  कि '' तुम  समझते किओ  नहीं ,कम से कम पहले एक लाटरी का टिकिट तो ख़रीद लो ''

Thursday, 14 November 2013

ये अरबपतियों के 20 कथन आप का जीवन बदल देंगे


अरबपतियों के प्रेरक  कथन
Quote 1 सफलता  की  ख़ुशी  मानना  अच्छा  है  पर  उससे  ज़रूरी  है  अपनी  असफलता  से  सीख  लेना 
Bill Gates , Business Magnate, Investor & Philanthropist
Quote 2:   विजेता  बनने  का  एक  हिस्सा  ये  जानना  है  कि  कब  हद   पार  हो  चुकी  है  . कभी -कभी  आपको  लड़ाई  छोड़  कर  जाना  पड़ता  है , और  कुछ  और  करना  होता  है  जो  अधिक  प्रोडक्टिव  हो .
Donald Trump ,American Business Magnate, Investor & TV Personality
Quote 3:  जब  दुनिया  बदलने  की  बात  हो  तो  कोई  भी  काम  छोटा  नहीं  है …मैन  जब  भी  किसी  ऐसे  उद्द्यमी   से  मिलता हूँ  जो  सभी  बाधाओं  के  खिलाफ  सफल  हो  रहा  हो  तो  मुझे  प्रेरणा  मिलती   है .
Cyril Ramaphosa ,South African Politician & Businessman
Quote 4:  सफलता  का  फार्मूला  : जल्दी  उठो , कड़ी  मेहनत  करो , लकी  रहो .
 J. Paul Getty ,Founder of Getty Oil Company
Quote 5:शायद  विजन  ही  हमारी  सबसे  बड़ी  ताकत  है …इसने  हमें  सदियों  से  विचारों  की  शक्ति  और  निरंतरता  के  माध्यम  से  ज़िंदा  रखा  है , ये  हमें  भविष्य  में  झाँकने  और  अज्ञात  को  आकार  देने  में  सहायक  होता  है .
Li Ka-Shing , Hong Kong Business Magnate & Philanthropist
Quote 6: मैं  जैसे -जैसे  बूढ़ा   हो  रहा  हूँ  , मैं  इस  बात पर  कम  ध्यान  देता  हूँ  कि  आदमी  क्या कह  रहा है . मैं  बस  देखता  हूँ  कि  वो  क्या  कर  रहा  है .
 Andrew Carnegie ,Steel Magnate
Quote 7:  जिसे  और  लोग  विफलता  का  नाम  देने  या  कहने  की  कोशिश  करते  हैं , मैंने  सीखा  है  कि  वो  बस  भगवान्  का  आपको  नयी  दिशा  में  भेजने  का  तरीका  है .
 Oprah Winfrey ,Talk Show Host, Producer & Philanthropist
Quote 8:ये  मत  सोचो  कि  तुम्हे  रोका  नहीं  जा  सकता  या  तुमसे  गलती  नहीं  हो  सकती . ये  मत  सोचो  कि  तुम्हारा  बिजनेस  सिर्फ  परफेक्शन  के  साथ  काम  करेगा . परफेक्शन  को  लक्ष्य  मत  बनाओ . सफलता  को  लक्ष्य  बनाओ .
 Eike Batista, Brazilian Business Magnate
Quote 9: मेरे  लिए  व्यवसाय  बसों  की  तरह  है . आप  एक  कोने  में  खड़े  होते  हैं  और  पहली  बस  जहाँ  जा  रही  है  वो  आपको  पसंद  नहीं  ? दस  मिनट  प्रतीक्षा  कीजिये  और  दूसरी  ले  लीजिये . ये  भी  पसंद  नहीं ? वे  आती  रहेंगी . बसों  और  व्यवसायों  का  कोई  अंत  नहीं  है .
Sheldon Adelson, American Business Magnate
Quote 10:  मजे  लीजिये . खेल  में  तब  कहीं  ज्यादा  मजेदार  हो  जाता  है  जब  आप  सिर्फ  पैसे  कमाने  से  बढ़कर  काम  करते  हैं .
Tony Hsieh ,Founder of Zappos
Quote 11: यदि  आप  सोचते  हैं  कि  आप  कोई  काम  कर  सकते  हैं  या ये  सोचते  हैं  कि  आप  कोई  काम  नहीं  कर  सकते  हैं , आप  सही  हैं .
Henry Ford, Founder of Ford Motors
Quote 12:यदि  आप  चाहते  हैं  कि  कभी  आपकी  निंदा  ना  की  जाये  तो  भगवान्  के  लिए  कुछ  नया मत   कीजिये .
Jeff Bezos, Founder of Amazon
Quote 13: सबसे  बड़ा  रिस्क  कोई रिस्क  ना  लेना  है …इस  दुनिया  में जो सचमुच  इतनी  तेजी  से  बदल  रही  है , केवल  एक  रणनीति   जिसका  फेल  होना  तय  है  वो  है  रिस्क  ना  लेना .
Mark Zuckerberg, Founder & CEO of Facebook
Quote 14: वफादारी  सबसे  पहला  होने  से  नहीं  जीती  जाते . ये  सबसे  अच्छा  होने  से  जीती  जाती  है .
Stefan Persson, Founder of H&M
Quote 15: नियम नम्बर १: कभी पैसा मत गंवाइये . नियम नम्बर २: कभी नियम नम्बर १ मत भूलिए.
 Warren Buffett , Business Magnate, Investor & Philanthropist
Quote 16: मैं मानता हूँ कि हमारी मूल सोच है कि हमारे लिए विकास जीने का एक तरीका है और हमें हर समय विकास करना है .
Mukesh Ambani, Indian Business Magnate
Quote 17: व्यवसाय पर आधारित मित्रता , मित्रता पर आधारित व्यवसाय से बेहतर है .
John D. Rockefeller ,  Founder of  the Standard Oil Company & Philanthropist
Quote 18: कड़ी मेहनत निश्चित रूप से आपको बहुत आगे तक ले जाती है . आज-कल बहुत से लोग कड़ी मेहनत करते हैं, इसलिए आपको सुनिश्चित करना होगा कि आप और भी परिश्रम से काम करें और सचमुच खुद को उस काम के प्रति समर्पित कर दें जो आप कर रहे हैं और जिसे आप पाना चाहते हैं.
Lakshmi Mittal,Indian Steel Magnate
Quote 19:यदि लोग आपके लक्ष्य पर हंस नहीं रहे हैं तो आपके लक्ष्य बहुत छोटे हैं.
Azim Premji ,Indian Businessman & Philanthropist
Quote 20 :आप कस्टमर से यह नहीं पूछ सकते कि वो क्या चाहते हैं और फिर उन्हें वो बना के दें.आप जब तक उसे बनायेंगे तब तक वो कुछ नया चाहने लगेंगे.

बच्चों के प्रिय चाचा नेहरु का जन्मदिवस बाल दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है।

zzzzzz.jpegजवाहरलाल नेहरु जी का जन्म 14 नवम्बर, 1889 को इलाहाबाद के एक अतिसंपन्न परिवार में हुआ था। कानून शास्त्र के ज्ञाता मोतीलाल नेहरू उनके पिता थे जो जटिल से जटिल मामलों को भी बङी सरलता से हल कर देते थे। उनकी माँ का नाम स्वरूप रानी नेहरू था।
मोतीलाल जी के घर में कभी भी किसी प्रकार की घार्मिक कट्टरता और भेद-भाव नही बरता जाता था। जवाहरलाल बालसुलभ जिज्ञासा और कौतूहल से धार्मिक रस्मों और त्योहारों को देखा करते थे। नेहरु परिवार में कश्मीरी त्योहार भी बङे धूम-धाम से मनाया जाता था। जवाहर को मुस्लिम त्योहार भी बहुत अच्छे लगते थे। धार्मिक रस्मों और आकर्षण के बावजूद जवाहर के मन में धार्मिक भावनाएं विशवास न जगा सकी थीं। बचपन में जवाहर का अधिक समय उनके यहाँ के मुंशी मुबारक अली के साथ गुजरता था। मुंशी जी गदर के सूरमाओं और तात्याटोपे तथा रानी लक्ष्मीबाई की कहानियाँ सुनाया करते थे। जवाहर को वे अलिफलैला की एवं और दूसरी कहानियाँ भी सुनाते थे।
बच्चों के प्रिय चाचा नेहरु का जन्मदिवस बाल दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है। नेहरू जी का जन्मदिन उनके पहले जन्मदिन से ही एक अलग अंदाज में मनाया जाता था। जन्म के बाद से लगातार हर वर्ष 14 नवम्बर के दिन उन्हें सुबह सवेरे तराजू में तौला जाता था। तराजू में बाट की जगह गेँहू या चावल के बोरे रखे जाते थे। तौलने की यह क्रिया कई बार होती थी। कभी मिठाई तो कभी कपङे बाट की जगह रखे जाते थे। चावल, गेँहु, मिठाई एवं कपङे गरीबों में बाँट दिये जाते थे। बढती उम्र के साथ बालक जवाहर को इससे बहुत खुशी होती थी। एक बार जवाहरलाल ने अपने पिता से पूछा कि हम एक वर्ष में एक से ज्यादा बार जन्मदिन क्यों नही मनाते ताकि अधिक से अधिक लोगों की सहायता हो सके। बालक जवाहर का ये प्रश्न उनकी उदारता को दर्शाता है।
भारत की स्वतंत्रता के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था। एक बार की बात है कि ”मोतीलाल नेहरु अपने घर में पिंजरे में तोता पाल रखे थे। एक दिन जवाहर ने तोते को पिंजरे से आज़ाद कर दिया। मोतीलाल को तोता बहुत प्रिय था। उसकी देखभाल एक नौकर करता था। नौकर ने यह बात मोतीलाल को बता दी। मोतीलाल ने जवाहर से पूछा, ‘तुमने तोता क्यों उड़ा दिया। जवाहर ने कहा, ‘पिताजी पूरे देश की जनता आज़ादी चाह रही है। तोता भी आज़ादी चाह रहा था, सो मैंने उसे आज़ाद कर दिया।’”
जवाहर लाल नेहरु अपने पिता मोतीलाल नेहरु से अत्यधिक प्रभावित थे। मोतीलाल नेहरु पर पाश्चात्य संस्कृति का अधिक असर था, अतः जवाहर को 13 मई, 1905 को लन्दन के निकट हैरो (Harrow) में शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेज दिया गया। हैरो में ही “हैरो स्कूल” नाम का एक प्राइवेट बोर्डिगं स्कूल था, जहाँ संभ्रान्त अंग्रेजों के बच्चों को शिक्षा दी जाती थी। जवाहर पढाई में शुरू से अच्छे थे किन्तु लेटिन भाषा में कुछ पिछङे हुए थे। इसका कारण ये था कि उन्हे लैटिन जैसी मृत भाषा पसन्द नही थी। मोतीलाल नेहरु जवाहर को अच्छे काम के लिए अक्सर ईनाम में किताबें दिया करते थे। लैटिन भाषा के प्रति रुचि जगाने हेतु उन्होने जवाहर को गैरीबाल्डी के बारे में जी. एम. ट्रैविलियन की किताब इनाम में दी। गैरीबाल्डी को पढने के बाद इटली के एकीकरण की लङाई, जनवादी जनतंत्र की स्थापना की लङाई में अपनी व्यापकता, ऐतिहासिक महत्व और उदात लक्ष्यो से जवाहर अभिभूत हो गये। जवाहर लाल नेहरु जी ने कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। जब वे कैम्ब्रिज में पढाई कर रहे थे तो वहाँ उन्हे विपिन्न चन्द्र पाल, लाला लाजपत राय और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे देशभक्तो को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। जवाहर, गोपाल कृष्ण गोखले से अत्यधिक प्रभावित हुए।
भारत गवर्नर-जनरल लार्ड कर्जन की दमनात्मक नीति के भीषण दौर से गुजर रहा था। कर्जन ने बंगाल में हिन्दु और मुसलमान को दो भागों में विभाजित कर दिया था। सारे देश में क्षोभ का ज्वार उमङ पङा था। इंग्लैंण्ड में जब जवाहर को ये खबर पता चली तो उनका खून खौल उठा। धन-धान्य से संपन्न परिवार में जन्में जवाहरलाल को सर्वसुविधा प्राप्त थी। इसके बावजूद ऐश्वर्य के माया जाल से नेहरु जी मोहित नही हुए उनमें देश प्रेम की भावना हिलोरे लेने लगी। जवाहरलाल गरमदल वालों की कारवाइयों का पक्ष लेते और भारत के स्वाधीनता आन्दोलन के पैमाने पर खुशी जताते थे। फिक्र सिर्फ इस बात की थी कि उनकी राय पिता की राय से मेल नही खाती थी इसके बावजूद परस्परविरोधी मत व्यक्त करने में कोई बाधा उत्पन्न नही होती थी क्योंकि वार्तालाप में पुत्र की आज्ञाकारिता और पिता का स्नेह झलकता था। उन दिनों टाइम्स में खबर छपी कि कश्मीर में स्वदेशी आंदोलन फैल गया है वहाँ लोगों ने चन्दा करके अंग्रजी चीनी खरीद ली और उसे जला दिया। ये घटनाएं देशप्रेम की भावनाओं को और मजबूत करती रहीं।
1912 में जब भारत वापस आए तो अपने पिता के असिस्टेंट के रूप में वकालत की प्रैक्टिस करने लगे। पिता के मार्गदर्शन में उनकी वकालत की तारीफ होने लगी थी। उनके जिरहों में सजीवता और अभियोग पक्ष की भूलों को पकङने की योग्यता साफ दिखाई देने लगी थी। जब जवाहर को एक मुवक्किल से फीस के रूप में 500 रूपये का नोट मिला तो मोतीलाल नेहरु बेटे की प्रगति पर बहुत खुश हुए। वकालत अच्छी चल रही थी फिर भी जवाहर का मन इस पेशे से खुश नही था उनका मन तो देशप्रेम की बातों में रमने लगा था। कुछ समय पश्चात जवाहर देश भक्ति के रंग में पूरी तरह से रंग गये।
भारत लौटने के चार वर्ष बाद मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कमला कौल के साथ हुआ। 1917 में जवाहर लाल नेहरू होम रुल लीग‎ में शामिल हुए। 1919 में  जब वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए तब से सही मायने में राजनीति में प्रवेश किये। उस समय महात्मा गांधी ने रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति बहुत आकर्षित हुए थे।
गॉधी जी से मिलने के बाद मोतीलाल नेहरु पर भी देशप्रेम का रंग चढ गया था। जवाहरलाल और मोतीलाल नेहरू ने पश्चिमी कपडों और महंगी संपत्ति का त्याग कर दिया। वे अब खादी कुर्ता और गाँधी टोपी पहनने लगे। जवाहर लाल नेहरू ने 1920-1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया और इस दौरान पहली बार गिरफ्तार किए गए।
जवाहरलाल नेहरू 1924 में इलाहाबाद नगर निगम के अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में दो वर्ष तक सेवा की। मातृ-भूमि की स्वतंत्रता हेतु अक्सर अंग्रेजों द्वारा जेल भेज दिये जाते थे ऐसे ही एक अवसर पर 1942 से 1946 के दौरान जब वे अहमदनगर की जेल में थे वहाँ उन्होने ‘भारत एक खोज’ पुस्तक लिखी थी। जिसमें उन्होने भारत के गौरव पूर्ण इतिहास का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है।
दिसम्बर 1929 में, कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन लाहौर में आयोजित किया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुने गए। इसी सत्र के दौरान एक प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमें ‘पूर्ण स्वराज्य’ की मांग की गई। 26 जनवरी, 1930 को लाहौर में जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया। जवाहर लाल नेहरु 1930 और 1940 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे।
सन् 1947 में भारत को आजादी मिलने पर वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। संसदीय सरकार की स्थापना और विदेशी मामलों में ‘गुटनिरपेक्ष’ नीतियों की शुरूवात जवाहरलाल नेहरु द्वारा  हुई। पंचायती राज के हिमायती नेहरु जी का कहना था किः-
“अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टि से, आज का बड़ा सवाल विश्वशान्ति का है। आज हमारे लिए यही विकल्प है कि हम दुनिया को उसके अपने रूप में ही स्वीकार करें। हम देश को इस बात की स्वतन्त्रता देते रहे कि वह अपने ढंग से अपना विकास करे और दूसरों से सीखे, लेकिन दूसरे उस पर अपनी कोई चीज़ नहीं थोपें। निश्चय ही इसके लिए एक नई मानसिक विधा चाहिए। पंचशील या पाँच सिद्धान्त यही विधा बताते हैं।“
27 मई 1964 की सुबह जवाहर लाल नेहरु जी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी, डॉक्टरों के अनुसार उन्हे दिल का दौरा पङा था। दोपहर दो बजे नेहरु जी इह लोक छोङकर परलोक सिधार गये। उस समय उनके बिस्तर के पास टेबल पर रॉबर्ट फ्रास्ट की किताब खुली हुई पङी थी, जिसमें नेहरु जी ने अपनी प्रिय पंक्तियों को रेखांकित किया हुआ थाः-
The woods are lovely, dark and deep
But I have promises to keep
And miles to go before I sleep.
ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उन्हे मृत्यु का एहसास हो गया था और अपने जीवन दायित्व को पूरी तरह निभा चुके मनुष्य की भाँति उन्होने शान के साथ उसका वरण किया…..
सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा थाः-
‘जवाहर लाल नेहरू हमारी पीढ़ी के एक महानतम व्यक्ति थे। वह एक ऐसे अद्वितीय राजनीतिज्ञ थे, जिनकी मानव-मुक्ति के प्रति सेवाएं चिरस्मरणीय रहेंगी। स्वाधीनता-संग्राम के योद्धा के रूप में वह यशस्वी थे और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए उनका अंशदान अभूतपूर्व था।’
स्वतंत्रता के इतिहास में नेहरु जी का अपना एक विषेश स्थान है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु जी के जन्मदिवस पर हार्दिक अभिन्नदन के साथ कलम को विराम देते हैं।

Monday, 11 November 2013

यदि आप सपने देखें, कड़ी मेहनत करें और ईश्वर में आस्था रखें तो कुछ भी सम्भव है।”


Maricel Apatan Story in Hindiये एक लड़की की सच्ची कहानी है जो हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों के बावजूद जीवन को सकारात्मक तरीके से जीने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रेरणा देती है .
25 सितम्बर , 2000 की बात है . तब Maricel Apatan ( मैरिकेल ऐप्टैन) महज 11 साल की थी . उस दिन वो अपने अंकल के साथ पानी लाने के लिए बाहर निकली हुई थी. रास्ते में उन्हें चार -पांच लोगों ने घेर लिया , उनके हाथों में धारदार हथियार थे . उन्होंने अंकल से जमीन पर झुक जाने के लिए कहा और उन्हें बेहरहमी से मारने लगे .
ये देख Maricel सदमें में आ गयीं , वो उन लोगों को जानती थी , वे उसके पडोसी थे . उसे लगा कि अब उसकी जान भी नहीं बचेगी और  वो  उनसे बच कर भागने लगी . पर वो छोटी थी और हत्यारे आसानी से उसतक पहुँच गए …वो चिल्लाने लगी …, “कुया , ‘वाग पो , ‘वाग न ’यो एकांग टैगईन ! मावा पो कायो सा एकिन !” ( मुझे मत मारो …मुझ पर दया करो …)
पर उन दरिंदो ने उसकी एक ना सुनी , और उनमे से एक ने गले पर चाक़ू से वार कीया। Maricel जमीन पर गिरकर बेहोश हो गयी .जब थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो उसने देखा कि वहाँ खून ही खून था और वे लोग अभी भी वहीँ खड़े थे , इसलिए उसने बिना किसी हरकत के मरे होने का नाटक किया .
जब वे लोग चले गए तब वो उठी और घर की और दौड़ने लगी…. भागते -भागते ही उसने देखा कि उसकी दोनों हथेलियां हाथ से जुडी लटक रही हैं . यह देख Maricel और भी घबरा गयी , और रोते -रोते भागती रही …. जब वो अपने घर के करीब पहुँच गयी तब अपनी माँ को आवाज़ दी …
माँ बाहर आयीं और अपनी बेटी की ये हालत देख भयभीत हो गयीं , उन्होंने बेटी को तुरंत एक कम्बल में लपेटा और हॉस्पिटल ले गयीं . हॉस्पिटल दूर था , पहुँचते -पहुँचते काफी वक़्त बीत गया . डॉक्टर्स को कोई उम्मीद नहीं थी कि वे Maricel को बचा पाएंगे पर 5 घंटे के ऑपरेशन के बाद भी  वो ज़िंदा थी . पर डॉक्टर्स उसका हाथ नहीं बचा पाये थे .
परेशानियां यहीं नहीं ख़त्म हुईं , जब वे वापस गए तो उनका घर लूट कर जलाया जा चुका था . गरीब होने के कारण उनके पास हॉस्पिटल का बिल भरने के पैसे भी नहीं थे …पर दूर के एक रिश्तेदार आर्चबिशप अंटोनिओ लेडेसमा की मदद से वे बिल भर पाये और अपराधियों को सजा भी दिलवा पाये .
इतना कुछ हो जाने के बाद भी Maricel ने कभी भगवन को नहीं कोसा कि उसके साथ ही ऐसा क्यों हुआ , बल्कि उसका कहना है कि , “ ईश्वर में विश्वाश रखते हुए , मैं और भी दृढ निश्चियी हो गयी कि मुझे एक सामान्य जीवन जीना है . मुझे लगता है कि मैं दुनिया में किसी ज़रूरी मिशन के लिए हूँ इसीलिए मैं इस हमले से बच पायी हूँ .”
Maricel ने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और 2008 में होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी पूरा किया . और बचपन से खाना बनाने के शौक के कारण 2011 में शेफ बनने की शिक्षा पूरी की.
Maricel Apatan Hindi 2इतनी बड़ी डिसेबिलिटी के बावजूद जीवन में आगे जाने के जज़बे को आस -पास के लोग नज़रअंदाज नहीं कर सकते थे , और जल्द ही Maricel को मीडिया हाईलाइट करने लगा . ऐसे ही एक कार्यक्रम को देख कर होटल एडसा शांग्री -ला , Manila, Philippines ने उसे अपने यहाँ किसी प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका दिया .
Maricel के साथ काम करने वाले शेफ अल्ज़ामिल बोर्जा बताते हैं ,“वो मदद के लिए सिर्फ तभी पुकारती हैं जब उन्हें कोई गरम पात्र हटाना होता है या किसी शीशी का चिकना ढक्कन खोलना होता है .”
Maricel Apatan Hindi 3Maricel आज भी उसी होटल में बतौर शेफ काम करती हैं और अपने जज़बे के दम पर लाखो -करोड़ों लोगो को प्रेरित करती रहती हैं .
Friends, अक्सर हम अपनी life में आने वाली छोटी -मोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं और अपना विश्वास कमजोर कर बैठते हैं , पर आज की ये कहानी बताती है कि situation कितनी ही खराब क्यों न हो हम उसे बदल सकते हैं। Maricel की कही एक बात हमें याद रखनी चाहिए- , ” यदि आप सपने देखें, कड़ी मेहनत करें और ईश्वर में आस्था रखें तो कुछ भी सम्भव है।”

Sunday, 10 November 2013

माला सिन्हा और जॉनी वॉकर को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं..

एक ने नेपाल से आकर हिंदुस्तानियों के दिल पर राज किया तो दूसरे ने इंदौर की गलियों से निकलकर भारतीय दर्शकों को हंसने का अंदाज़ सिखाया।
माला सिन्हा और जॉनी वॉकर उर्फ बहरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी का आज जन्मदिन है।
जॉनी जी आज हमारे बीच मौजूद नहीं और माला जी को इंडस्ट्री छोड़े अरसा हो गया। पर हमारे ज़हन में तो आज भी इनका फ़न ताज़ा है न?
लाइक, शेयर और कॉमेंट करके जॉनी वॉकर को दीजिए श्रद्धांजलि और माला सिन्हा को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं..

Friday, 8 November 2013

हैप्पी बर्थडे लाल कृष्ण आडवाणी

लालकृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ट नेता हैं। भारतीय जनता पार्टी को भारतीय राजनीति में एक प्रमुख पार्टी बनाने में उनका योगदान सर्वोपरि कहा जा सकता है। वे कई बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। जनवरी २००८ में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबन्धन (एन डी ए) ने लोकसभा चुनावों को आडवाणी के नेतृत्व में लडने तथा जीत होने पर उन्हे प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की थी।
भारतीय जनता पार्टी के जिन नामों को पूरी पार्टी को खड़ा करने और उसे राष्ट्रीय स्तर तक लाने का श्रेय जाता है उसमें सबसे आगे की पंक्ति का नाम है लालकृष्ण आडवाणी । लालकृष्ण आडवाणी कभी पार्टी के कर्णधार कहे गए, कभी लौह पुरुष और कभी पार्टी का असली चेहरा। कुल मिलाकर पार्टी के आजतक के इतिहास का अहम अध्याय हैं लालकृष्ण आडवाणी।

राजनैतिक जीवन

वर्ष 1951 में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की। तब से लेकर सन 1957 तक आडवाणी पार्टी के सचिव रहे। वर्ष 1973 से 1977 तक आडवाणी ने भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष का दायित्व संभाला। वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद से 1986 तक लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के महासचिव रहे। इसके बाद 1986 से 1991 तक पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व भी उन्होंने संभाला।
इसी दौरान वर्ष 1990 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली। हालांकि आडवाणी को बीच में ही गिरफ़्तार कर लिया गया पर इस यात्रा के बाद आडवाणी का राजनीतिक कद और बड़ा हो गया।1990 की रथयात्रा ने लालकृष्ण आडवाणी की लोकप्रियता को चरम पर पहुँचा दिया था। वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया है उनमें आडवाणी का नाम भी शामिल है।
लालकृष्ण आडवाणी तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। आडवाणी चार बार राज्यसभा के और पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे। वर्तमान में भी वो गुजरात के गांधीनगर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के सांसद हैं।वर्ष 1977 से 1979 तक पहली बार केंद्रीय सरकार में कैबिनेट मंत्री की हैसियत से लालकृष्ण आडवाणी ने दायित्व संभाला। आडवाणी इस दौरान सूचना प्रसारण मंत्री रहे।
आडवाणी ने अभी तक के राजनीतिक जीवन में सत्ता का जो सर्वोच्च पद संभाला है वह है एनडीए शासनकाल के दौरान उपप्रधानमंत्री का। लालकृष्ण आडवाणी वर्ष 1999 में एनडीए की सरकार बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेत़ृत्व में केंद्रीय गृहमंत्री बने और फिर इसी सरकार में उन्हें 29 जून, 2002 को उपप्रधानमंत्री पद का दायित्व भी सौंपा गया।
भारतीय संसद में एक अच्छे सांसद के रूप में आडवाणी अपनी भूमिका के लिए कभी सराहे गए तो कभी पुरस्कृत भी किए गए।

जीवन वृत्त

आठ नवंबर, 1927 को वर्तमान पाकिस्तान के कराची में लालकृष्ण आडवाणी का जन्म हुआ था । उनके पिता श्री के डी आडवाणी और माँ ज्ञानी आडवाणी थीं । विभाजन के बाद भारत आ गए आडवाणी ने 25 फ़रवरी, 1965 को 'कमला आडवाणी' को अपनी अर्धांगिनी बनाया । आडवाणी के दो बच्चे हैं।
लालकृष्ण आडवाणी की शुरुआती शिक्षा लाहौर में ही हुई पर बाद में भारत आकर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक किया । आज वे भारतीय राजनीति में एक बड़ा नाम हैं। गांधी के बाद वो दूसरे जननायक हैं जिन्होंने हिन्दू आंदोलन का नेतृत्व किया और पहली बार बीजेपी की सरकार बनावाई । लेकिन पिछले कुछ समय से अपनी मौलिकता खोते हुए नज़र आ रहे हैं। जिस आक्रामकता के लिए वो जाने जाते थे, उस छवि के ठीक वीपरीत आज वो समझौतावादी नज़र आते हैं । हिन्दुओं में नई चेतना का सूत्रपात करने वाले आडवाणी में लोग नब्बे के दशक का आडवाणी ढूंढ रहे हैं । अपनी बयानबाज़ी की वजह से उनकी काफी फज़ीहत हुई । अपनी किताब और ब्लॉग से भी वो चर्चा में आए। आलोचना भी हुई ।

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