इसका अर्थ है कि मै आपके भीतर बैठी दिव्यता एंव अच्छाई को नमन करता हूॅ। मेरे भीतर की दिव्यता आपके भीतर विराजमान दिव्यता का सम्मान करती है। नमस्कार स्वागत एंव सम्मान देने का गेष्चर है। इसमे आपका बड़प्पन है एंव विनम्रता झलकती है। स्वयं को भी नमस्कार करे। नमस्कार आपका परिचय भी खुद से कराता है जहां संचित रहती है अनलिमिटेड एनर्जी। एक छोटा सा नमस्कार आपको दूसरो से अधिक सक्षम और प्रतिभाशली बनाने की क्षमता रखता है।श
जय श्री राम, प्रणाम, हैलो, जय माता दी , सलाम, आदि नमस्कार के ही अवतार है। इनमे षब्दांे का कुल मिलाकर भावार्थ समान ही है। हाथ मिला कर, हाथ जोड कर, हाथ उॅचे करे, गर्दन झुकाकर, मुस्कुरा कर आदि तरीको से भी नमस्कार किया जाता है।